एक इंसान जो शैतान कभी बनना नहीं चाहता,लेकिन उसे शैतान बनना पड़ता है। ऐसे हालात बन जाते है जिसकी वजह से ब्रह्माण्ड को बचाने के लिए नाग कन्याओं को आना पड़ता है। और जब नाग कन्याएं आती है तो साथ आता है उनका विहार!एक अदभुद विहार,जिसकी कल्पना मात्र से शैतान की रूह तक कांप उठती है !
बड़ी मुश्किल से एक सप्ताह का वक्त ही तो हुआ था,जब वह मोहन से मिली थी,पर वे दोनों इतने नज़दीक आ गए थे। उनके बीच की ये गहराई शायद मोहन की प्यारी अदा,उसकी न भूलने वाली मनमोहक मुस्कान की वजह से थी, जो रोते हुए को हँसा दे और मरते हुए में भी जान फूँक दे।
नीलिमा और कालिंदी के लिए वह सिर्फ एक प्यारा, मासूम बच्चा था, जो नींद में भी अपने आसपास के लोगों को मोह लेता था। लेकिन उनकी यह दुनिया जल्द ही गोलियों और मिसाइलों के शोर से हिल उठी, और मोहन का शांत चेहरा एक ऐसे अजेय शैतान में बदल गया जिस पर न गोलियों का असर होता था और न ही ज़हर का। मोहन का दर्द उसके प्रेतयोनि में जन्म से शुरू हुआ था, जब उसके ही परिवार ने उसे उसे मारने की कोशिश की और सड़कों पर छोड़ दिया,लेकिन वहाँ भी उसे शैलजा और रतन जैसे दयालु लोग मिले |